जब परिवार के पितर (पूर्वज) अतृप्त रह जाते हैं — किसी अकाल मृत्यु के कारण, या अधूरे रह गए संस्कारों के चलते — तो ज्योतिष शास्त्र में इसे पितृ दोष कहा जाता है। शिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट, उज्जैन में सदियों से नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध और पिंड दान की विधि संपन्न होती आई है। mangalbhav.com पर घर बैठे अनुभवी आचार्यों से यह पूजा बुक करना बेहद आसान है।
पौराणिक मान्यता है कि इस प्राचीन वटवृक्ष स्थल पर सदियों से नगर श्राद्ध और नारायण बलि जैसे अनुष्ठान अतृप्त आत्माओं की शांति हेतु संपन्न किए जाते रहे हैं — गया के समान ही इसे भी इस विधि के लिए सबसे प्रामाणिक स्थलों में गिना जाता है। यहां हर पूजा शास्त्रों में बताए गए क्रम के अनुसार, बिना किसी कमी के संपन्न कराई जाती है।
Mangal Bhav से जुड़े हमारे अनुभवी आचार्यों को पितृ दोष निवारण, नारायण बलि एवं त्रिपिंडी श्राद्ध पूजन का 15+ वर्षों का अनुभव है, और अब तक 4,000+ परिवारों ने पूरी पारदर्शिता के साथ यहां यह विधि संपन्न करवाई है — संकल्प, मंत्र-जाप और विधिवत पूजन, हर चरण की जानकारी के साथ।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य या नवम भाव (पिता एवं पितरों का भाव) पर राहु, केतु या शनि का प्रभाव पड़ता है, या फिर पूर्वजों के अधूरे रह गए संस्कारों का बोझ वंश पर बना रहता है, तब इसे पितृ दोष कहा जाता है।
इसका प्रभाव अक्सर विवाह में देरी, बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, कड़ी मेहनत के बावजूद धन की अस्थिरता, या परिवार में बिना वजह के तनाव के रूप में देखा जाता है। हर कुंडली में इसकी तीव्रता एक जैसी नहीं होती — कौन से ग्रह जुड़े हैं और वे किस स्थिति में हैं, यही असली प्रभाव तय करता है। नीचे दिए गए किसी भी कारण पर क्लिक करके विस्तार से जानें।
अगर जीवन में बार-बार यह परिस्थितियां सामने आ रही हैं, तो किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना उचित हो सकता है —
उज्जैन का सिद्धवट शिप्रा नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन वटवृक्ष स्थल है, जिसे पुराणों में पितरों के पिंड दान के लिए प्रमुख तीर्थों में गिना गया है। यहां पीढ़ियों से श्रद्धालु उन पूर्वजों की शांति के लिए नारायण बलि एवं त्रिपिंडी श्राद्ध करवाने आते रहे हैं, जिनके संस्कार अधूरे रह गए थे।
देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आकर अपनी जन्म कुंडली के अनुसार पितृ दोष निवारण पूजा करवाते हैं, ताकि पितरों को शांति मिले और पितृ दोष से जुड़ी बाधाएं दूर हो सकें।
पहले तय करें आप पूजा कैसे करवाना चाहते हैं — नीचे दिया गया विकल्प पूरे पेज की जानकारी और कीमत, दोनों बदल देगा।
पितृ दोष निवारण पूजा के लिए पितृ पक्ष और अमावस्या को परंपरागत रूप से सबसे शुभ माना जाता है, हालांकि अन्य उपयुक्त तारीखों पर भी यह पूजा संपन्न की जा सकती है। आपकी सुविधा और पंडित जी की उपलब्धता के अनुसार, हमारे ज्योतिषी आपके साथ सही तारीख तय करेंगे।
नीचे दिया गया पैकेज चुनें — सारांश बार तुरंत अपडेट हो जाएगा।
बिल्कुल नहीं। पितृ दोष केवल यह दर्शाता है कि किसी पूर्वज के संस्कार अधूरे रह गए हैं, यह कोई स्थायी श्राप नहीं है। विधिपूर्वक नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध या पिंड दान करवाने से इसका समाधान होना माना जाता है।
बुकिंग के समय mangalbhav.com पर अपनी जन्म तारीख, समय और स्थान साझा करें — हमारे ज्योतिषी आपकी कुंडली देखकर सटीक स्थिति बताएंगे।
नारायण बलि उस आत्मा के लिए की जाती है जिसकी मृत्यु अकाल या अस्वाभाविक रूप से हुई हो और जिसे मोक्ष के लिए विशेष विधि की आवश्यकता होती है। त्रिपिंडी श्राद्ध में तीन पिंडों के माध्यम से अतृप्त पूर्वजों की तीन श्रेणियों को एक साथ शांति दी जाती है। पूर्ण शांति के लिए कई परिवार दोनों अनुष्ठान एक ही बैठक में करवाते हैं।
चुने गए पैकेज के अनुसार, नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध, पिंड दान और हवन सहित पूरी पूजा लगभग 3 से 4 घंटे में पूरी होती है।
जी हां, mangalbhav.com पर सभी पेमेंट एक सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड गेटवे के माध्यम से होते हैं और बुकिंग तुरंत कन्फर्म हो जाती है।
जी हां, पूजा की तारीख से 48 घंटे पहले तक बदली जा सकती है। इसके लिए नीचे दिए गए संपर्क विवरण या मंगल भाव ऐप का इस्तेमाल करें।
पितृ दोष पूजा बुकिंग, कुंडली परामर्श या किसी भी जानकारी के लिए मंगल भाव से जुड़ें।
पितृ दोष पूजा, तारीख या मूल्य से जुड़ा कोई सवाल है? हम जल्दी ही जवाब देंगे।