पौराणिक मान्यता है कि मंगल ग्रह की उत्पत्ति स्वयं उज्जैन में, शिप्रा नदी के तट पर स्थित मंगलनाथ मंदिर से हुई थी। यही कारण है कि मांगलिक दोष और मंगल दोष निवारण पूजा के लिए यह स्थान सबसे शुभ माना जाता है। mangalbhav.com पर घर बैठे अनुभवी आचार्यों से यह पूजा बुक करना बेहद आसान है।
पौराणिक मान्यता है कि मंगल देव का प्राकट्य उज्जैन की इसी पवित्र भूमि पर हुआ था — यही वजह है कि मंगलनाथ मंदिर, Mangal Dosh Puja और मांगलिक शांति अनुष्ठान के लिए सबसे प्रामाणिक स्थल माना जाता है। यहां हर पूजा शुद्ध वैदिक विधि-विधान से, शास्त्रों में बताए गए क्रम के अनुसार ही संपन्न कराई जाती है।
Mangal Bhav से जुड़े हमारे अनुभवी आचार्यों को मंगल दोष निवारण एवं मांगलिक शांति पूजन का 15+ वर्षों का अनुभव है, और अब तक 5,000+ परिवारों ने यहां शास्त्र-सम्मत विधि से पूजा संपन्न करवाई है। हर अनुष्ठान संकल्प, मंत्र-जाप और विधिवत पूजन के साथ पूरी पारदर्शिता से किया जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के 1st, 2nd, 4th, 7th, 8th या 12th भाव में मंगल ग्रह विराजमान होता है, तब उसे मंगल दोष या मांगलिक दोष कहा जाता है।
इसका सबसे ज्यादा असर वैवाहिक जीवन पर देखा जाता है — कभी शादी में बार-बार देरी, कभी जीवनसाथी के साथ मन-मुटाव, तो कभी स्वभाव में अनावश्यक गुस्सा और उतावलापन। लेकिन हर Manglik कुंडली उतनी ही प्रभावशाली नहीं होती — मंगल किस राशि में है, किसकी दृष्टि उस पर पड़ रही है, यह देखकर ही असली प्रभाव तय होता है।
उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर इस दोष की शांति के लिए सबसे पवित्र स्थान माना गया है, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार मंगल का जन्म यहीं, शिप्रा के तट पर हुआ था। नीचे दिए गए किसी भी भाव पर क्लिक करके उसका प्रभाव जानें।
अगर जीवन में बार-बार यह परिस्थितियां सामने आ रही हैं, तो किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना उचित हो सकता है —
उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर वह पावन स्थल है जहां, पौराणिक कथाओं के अनुसार, भूमि-पुत्र मंगल का प्राकट्य हुआ था। शिप्रा नदी के किनारे बसा यह मंदिर सदियों से मंगल ग्रह की शांति और मांगलिक दोष निवारण के लिए सबसे श्रेष्ठ तीर्थ माना जाता है।
देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आकर अपनी जन्म कुंडली के अनुसार Mangal Dosh Nivaran Puja करवाते हैं, ताकि विवाह में आ रही रुकावटें और जीवन की अशांति दूर हो सके।
आपकी जन्म कुंडली के अनुसार, योग्य आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त क्रम में की जाने वाली विधि।
आचार्य आपकी जन्म कुंडली देखकर मंगल की स्थिति confirm करते हैं और नाम-गोत्र से संकल्प लेते हैं।
विघ्नहर्ता श्री गणेश और नवग्रहों की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
भगवान शिव का जल, दूध, शहद और बिल्वपत्र से अभिषेक, मंगल ग्रह की शांति के लिए।
"ॐ अं अंगारकाय नमः" जैसे शास्त्र-सम्मत मंत्रों का विधिपूर्वक जाप किया जाता है।
हवन कुंड में आहुति और पूर्णाहुति के साथ पूजा का समापन होता है।
पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद, पूजा वीडियो और डिजिटल कम्प्लीशन सर्टिफिकेट भेजा जाता है।
Mangal Dosh Nivaran Pooja ke liye Mangalvar ka din sabse zyada shubh maana jaata hai। Taareekh aapki suvidha aur pandit ji ki availability ke hisab se tay hoti hai।
नीचे दिया गया पैकेज चुनें — सारांश बार तुरंत अपडेट हो जाएगा।
बिल्कुल नहीं। बहुत सी कुंडलियों में मंगल दोष का प्रभाव बहुत हल्का होता है, या "मांगलिक दोष भंग" जैसी स्थितियों से अपने आप कम हो जाता है। सही विधि से पूजा करवा कर इसका प्रभाव और भी कम किया जा सकता है।
बुकिंग के समय mangalbhav.com पर अपनी जन्म तारीख, समय और स्थान साझा करें — हमारे ज्योतिषी आपकी कुंडली देखकर सटीक स्थिति बताएंगे।
रुद्राभिषेक और हवन सहित पूरी मंगल दोष निवारण पूजा, चुने गए पैकेज के अनुसार, लगभग 2 से 3 घंटे में पूरी होती है।
जी हां, mangalbhav.com पर सभी पेमेंट एक सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड गेटवे के माध्यम से होते हैं और बुकिंग तुरंत कन्फर्म हो जाती है।
मंगलवार का दिन इस पूजा के लिए परंपरा से सबसे शुभ माना जाता है, हालांकि पंडित जी की सलाह पर दूसरी शुभ तारीखें भी रखी जा सकती हैं।
जी हां, पूजा की तारीख से 48 घंटे पहले तक बदली जा सकती है। इसके लिए नीचे दिए गए संपर्क विवरण या मंगल भाव ऐप का इस्तेमाल करें।
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मंगल दोष पूजा, तारीख या मूल्य से जुड़ा कोई सवाल है? हम जल्दी ही जवाब देंगे।